(1) एक नजरिया :-

एक फैक्ट्री में एक इंजन ख़राब हो गया, बहुत सारे युवा उसे ठीक करने की कोशिश कर रहे थे पर 10 दिन तक कुछ नहीं हुआ. फैक्ट्री को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा था. तभी वहां एक बुजुर्ग आ गए जो किसी समय में वहां नौकरी करते थे. जैसे ही ये बात उन बुजुर्ग को पता चली तो उन्होंने इंजन को देखा और बस एक ही हथौड़ा मारा होगा उन बुजुर्ग व्यक्ति ने कि इंजन चालू हो गया.
जी हाँ ये कमाल था उनके अनुभव का. अगर हम अपनी समस्याओं का समाधान अपने बुजुर्गों से पूछें तो पाएंगे कि उनके पास एक ही समस्या के कई कई समाधान होते हैं, बस हमें पूछने की देर है.

(2) दूसरा नजरिया :-

कुछ बुजुर्ग एक टेढ़े मेढ़े पाइप में तार डालने की कोशिश कर रहे थे. कई घंटों की मेहनत के बाद भी जब वो तार को उस पाइप में नहीं डाल पाए तो एक बच्चा कहीं से चूहा पकड़ कर लाया और तार को उस चूहे की पूँछ में बाँध कर तार को पाइप के दूसरी तरफ से निकाल दिया.
जी हाँ, मान कर चलिए आजकल के बच्चों के पास आईडिये बहुत हैं और नई technology सिखने में भी उन्हें समय नहीं लगता.

(3) तीसरा नजरिया 

घर में किसी भी function में, अपने अनुभव से बुजुर्ग सारे प्रोग्राम बनाते हैं, युवा भाग दौड़ कर के उन कामों को पूरा करते हैं और बच्चे नए नए आईडिया दे कर उन प्रोग्रामों में चार चाँद लगा देते हैं. ये हैं हमारे अपने घरों में तीनों की एक साथ उपयोगिता।

इसी तरह मित्रों, अगर हमें भी भारत को एक भारत और श्रेस्ट भारत बनाना है तो हम तीनों (बुजुर्ग, युवा, बच्चे) को एक साथ मिल कर कोई भी काम करना होगा. सोच कर देखिये जिन देशों ने इस तकनीक को अपनाया है वे आज की तारीख में विकसित की category में हैं. ये प्रयोग सिर्फ देश को ही नहीं करना है, अगर हम भी अपने अपने घरों के हर छोटे बड़े कामों में भी ये प्रयोग करना शुरू कर दें तो समझिये हम भी जल्दी ही विकसित की category में आ जायेंगे।
अगर हम भी किसी तरह इन तीनों Generations को मिलाने में सफल हो गए तो समझिए हमने जिंदगी की 90% जंग तो जीत ली और फिर ये तिकड़ी कभी भी कोई बड़ा चमत्कार कर दे, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.
(1) बुजुर्गों - के पास अनुभव और समय दोनों हैं, जोश और आइडिया थोड़े कम हैं।
(2) युवाओं - के पास जोश है पर अनुभव थोड़ा कम है।
और
(3) बच्चों - के पास आईडिया बहुत हैं पर कब, कहाँ और कैसे लगाना है ये पता नहीं।
मित्रों मान कर चलिए जिनको भी ये रामबाण तरीका पता है वे वाकई चमत्कार कर रहे हैं, इसमें कोई शक नहीं।
हम भी आज से ही इसकी शूरुआत करें, देखेंगे की जल्द ही नतीजे चमत्कारी नज़र आएंगे।
हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बहुत ही सही कहा है :-

(a) "हमारा काम" ही हमारा "relaxation" होना चाहिए.
(b) "थकान काम न करने" की होती है, "काम करने" का तो "संतोष" होता है. "संतोष" हमेशा "नई शक्ति" देता है.
(c) थकान मनोवैज्ञानिक ज्यादा होती है और इससे किसी की क्षमता (Capacity) कम नहीं होती.
(d) काम जितना बड़ा होगा, हमारी क्षमता (Capacity) उतना अपने आप उभारेगी.
(e) हम नए नए challenge उठाते जायेगे तो हमारे अंदर से ताकत अपने आप उभरती जाएगी. ये सब हमारे पास inbuilt है, पर हम कभी इसका इस्तेमाल नहीं करते।

मित्रों ध्यान रहे :-
जिंदगी में जब कभी भी टूटने लगे हौसले,
तो बस ये बात याद रखना,
बिना मेहनत के हासिल तख्तो ताज नहीं होते,
ढूँढ़ ही लेते है अंधेरों में मंजिल अपनी,
जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते…..!