अनाथालय एक सुंदर कहानी - Anathlaya Heart Touching Hindi story

एक सत्य पर आधारित यथार्थ कहानी है आशा करता हूँ आप सबको पसंद भी आएगी। मेरी कोशिश है कि मेरी इस कहानी से आप सभी को कुछ सोचने और समझने को अवश्य विवश करेगा।

माँ के निधन के पश्चात इकलौते बेटे महेश ने पत्नी के कहने में आकर अपने पिता को वृद्धाश्रम में भेजने का निर्णय ले लिया। पिता की समस्त भौतिक वस्तुएं समेट महेश एक एनजीओ द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में अपने पिता को ले आया। 

अनाथालय एक सुंदर कहानी - Anathlaya Heart Touching Hindi story


काउंटर पर बैठी क्लर्क ने बहुत से विकल्प दिए टेलीविज़न, एसी, शाकाहारी, मांसाहारी इत्यादि। 
पिता ने सादे एक वक़्त के शाकाहारी भोजन को छोड़ सब के लिए मना कर दिया।
थोड़ी देर बाद महेश पिता का सामान कार से निकालने बाहर गया। तभी महेश की पत्नी ने फ़ोन किया ये पता लगाने के लिए कि सबकुछ ठीक से निपटा या नहीं।
और इस बात के लिए अपने पति महेश को ज़ोर देकर आगाह किया कि उसके पिता को अब त्यौहारों पर भी घर आने की ज़रुरत नहीं। 


एनजीओ के एक बड़े अधिकारी बाहर आये पिता को देख उनकी और बढ़ गये। और उनके दोनों कन्धों पर हाथ रख कर बात करने लगे। इस दौरान पिता हिम्मत से मुस्कुराते रहे। 
महेश को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने तुरंत निकट पहुंचकर उस बड़े अधिकारी से पूछा कि वो पूर्व परिचित हैं क्या?? जो इतनी बेतकल्लुफी से पिताजी से बात कर रहे हैं?
उस अधिकारी ने गीली आँखें पोछते हुए महेश को देखा और कहा हाँ! बहुत ही अच्छे से परिचित हूँ। आपके पिता 30 साल पहले यहां आये थे और अपने साथ इसी अनाथालय से एक अनाथ बच्चे को ले गए थे.... गोद लेने के लिए !!!!!

बेटा अवाक था...और निशब्द था ।।।

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